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उरुग्वे और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने दी नई अवधारणा, लूप क्वांटम ग्रैविटी सिद्धांत की ली गई मदद
ब्लैक होल्स से जा सकते हैं दूसरे ब्रह्मांडों में
वाशिंगटन। सदियों से अभी तक ब्रह्मांड लोगों के लिए अबूझ पहेली बना हुआ है। पुरानी खगोलीय मान्यताएं दिन-ब-दिन नए सिद्धांतों के आगे नतमस्तक हो रही हैं। तिस पर बात जब ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्य ब्लैक होल्स की हो तो यह और भी दिलचस्प हो जाता है।
अब वैज्ञानिकों ने एक नई अवधारणा दी है कि वास्तव में ब्लैक होल्स एक ब्रह्मांड से दूसरे ब्रह्मांड के सफर करने का रास्ता बन सकते हैं। जबकि अब तक यह माना जाता रहा है कि अपनी जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण क्षमता की वजह से ब्लैकहोल्स के आर-पार से कोई चीज गुजर ही नहीं सकती, बल्कि बडे़ बडे़ तारों समेत सभी वस्तुएं इसमें गिरने के बाद अपना अस्तित्व खोकर इसी में समाहित हो जाती हैं। इस नए सिद्धांत ने इस समय दुनिया में नई बहस छेड़ दी है।
दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे की राजधानी मोंटेवीडियो में बने यूनिवर्सिटी ऑफ द रिपब्लिक के भौतिकविज्ञानी रुडोल्फ गांबिनी और अमेरिका के लुईसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के जॉर्ज पुलिन ने ब्लैक होल को समझने के लिए लूप क्वांटम ग्रैविटी सिद्धांत का इस्तेमाल किया। इस सिद्धांत के जरिये अंतरिक्ष में ऊर्जा, गुरुत्वाकर्षण बल और समय के आपसी संबंधों की व्याख्या की गई है। इसके बाद ये वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ब्लैक होल में उसके केंद्र में सघनता के बावजूद वहां से दूसरे ब्रह्मांडों में जाया जा सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक वस्तुओं के ब्लैक होल में गिरने के बाद की जानकारी दे पाने में अभी तक नाकाम रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों की यह अवधारणा अगर सही साबित होती है, तो यह ब्रह्मांड के कुछ और अनसुलझे पहलुओं पर रोशनी डाल सकती है। शोध जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित हुआ है। एजेंसी
क्या है ब्लैक होल
ब्लैक होल अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जिसमें गुरुत्वाकर्षण बल इतना शक्तिशाली होता है कि कोई भी चीज इसके क्षितिज पर आने के बाद इसकी ओर बिना खिंचे बच नहीं सकती। इसे ब्लैक होल नाम इस बात को ध्यान में रखकर दिया गया कि विद्युत चुंबकीय विकिरण (प्रकाश) भी इससे बचकर नहीं निकल सकता। इसी वजह से इसका आंतरिक भाग दिखाई नहीं पड़ता। जब यह अपने क्षितिज से बाहर स्थित किसी चीज से अभिक्रिया करता है तो इसकी पहचान की जा सकती है।
मसलन, अपनी कक्षा में चक्कर काट रहे किसी तारे की गैस को अपने अंदर खींचना। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में विकिरण होता है।
आकार
ब्लैक होल बहुत छोटे और बड़े हो सकते हैं । वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे ब्लैक होल्स एक एटम के बराबर हो सकते हैं लेकिन इनका द्रव्यमान एक बड़े पहाड़ इतना होता है। एक दूसरे प्रकार का ब्लैक होल भी होता है जिसे स्टेलर कहते हैं। इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के 20 गुना होता है। पृथ्वी के गैलेक्सी में इस तरह के द्रव्यमान वाले ढेर सारे स्टेलर ब्लैक होल्स होते हैं। पृथ्वी के गैलेक्सी को मिल्की कहते हैं।
राजकुमार : रिर्सच

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